उत्कृष्ट अवधारणायें  2 - हमारे दैनिक जीवन में खगोलीय घटना का अनुभव किया जा सकता है

2.1

हमें दिन और रात का अनुभव पृथ्वी के अपनी धुरी के चारों ओर घूमने के कारण होता है।

पृथ्वी का जो भाग सूर्य के सामने होता है वहा दिन और उसके विपरीत वाला भाग रात अनुभव करता है | पृथ्वी को अपनी धुरी के चारों ओर घूमने में जो समय लगता है ताकि सूर्य आकाश में वापस उसी स्थान पर आ जाए, वह (सौर) दिन की अवधि को परिभाषित करता है, जो औसतन 24 घंटे होता है।

2.2

पृथ्वी एक वर्ष में सूर्य के चारों ओर घूमती है, इसके घूर्णन की धुरी के झुकाव के कारण हम मौसम का अनुभव करते हैं

पृथ्वी की घूर्णन धुरी सूर्य के चारों ओर उसके कक्षीय तल के लंबवत रेखा के सापेक्ष 23.4 डिग्री झुकी हुई है। इस कारण से, सूर्य के चारों ओर पृथ्वी की परिक्रमा के दौरान , उत्तरी या दक्षिणी गोलार्ध सूर्य की ओर झुका रहता है, जबकि दूसरा गोलार्ध सूर्य से दूर रहता है | जिससे कि पहले वाली स्थिति में गर्मियों का अनुभव होता है , क्योंकि सूरज की रोशनी सीधे उसकी सतह पर पड़ती है और सूरज का आकाश में अधिक ऊंचाई तक पहुंचने के कारण दिन लंबे होते हैं | दूसरी ओर, सूर्य से दूर झुके होने के कारण दूसरे गोलार्ध में सूरज की रोशनी पृथ्वी की सतह पर एक अत्यधिक न्यून कोण पर गिरती है, जिससे यह एक बड़े क्षेत्र में फैल जाता है| दिन छोटे हो जाते हैं क्योंकि सूरज आकाश में कम ऊंचाई पर होता है|

2.3

हम चंद्रमा द्वारा एक चक्कर लगाने में उसके विभिन्न चरणों को देखते हैं

जब चंद्रमा पृथ्वी की परिक्रमा करता है, सूर्य और पृथ्वी के लिये इसकी सापेक्ष स्थिति बदलती है| चंद्रमा की सतह का क्षेत्र जो सूर्य के प्रकाश से प्रकाशित होता है , पृथ्वी से दिखने वाले विभिन्न चरणों को दर्शाता है - अमावस्या, बढता घटता न्यू मून, वैक्सिंग क्रिसेंट, पूर्णिमा और वानिंग क्रिसेंट को पूर्णिमा से पूर्णिमा से 29.53 दिन लगते हैं| जबकि चंद्रमा के चरण पृथ्वी पर किसी भी पर्यवेक्षक के लिए ( कमोबेश ) समान हैं, पर्यवेक्षक के गोलार्ध के आधार पर चंद्रमा का उन्मुखीकरण अलग -अलग होगा| उदाहरण के लिए, कुछ पर्यवेक्षक चंद्रमा के अर्धचंद्राकार को बाईं ओर खुला देख सकते हैं, जबकि अन्य, एक ही चरण का अवलोकन करते हैं, लेकिन एक अलग स्थान से, क्रिसेंट को दाईं ओर खुला देख सकते हैं|

2.4

सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा के विशेष प्रकार से सीध मे आने के कारण ग्रहण होते हैं

कभी -कभी, जब चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के ठीक बीचसे गुजरता है, तो चंद्रमा सूर्य से प्रकाश को अवरुद्ध कर देता है और पृथ्वी पर उसकी एक छाया पड़ने लगती है, जिससे एक सूर्य ग्रहण होता है| कभी -कभी, पृथ्वी सीधे सूर्य और चंद्रमा के बीच हो सकती है| उस स्थिति में, पृथ्वी चंद्रमा पर एक छाया डालती है,और एक चंद्र ग्रहण होता है| जब पिंड के केवल एक अंश पर ही अँधेरा हो तो आंशिक ग्रहण, और पूरे पिंड पर अँधेरा हो जाय तो पूर्ण ग्रहण होता है | एक चंद्र ग्रहण केवल पूर्णिमा पर होता है और, परिणामस्वरूप, केवल रात में देखा जा सकता है| पृथ्वी पर किसी भी स्थान पर, आप द्वारा एक सूर्य ग्रहण की तुलना में एक चंद्र ग्रहण देखने की अधिक संभावना होती हैं| सूर्य ग्रहण की तुलना में चंद्र ग्रहण अधिक समय तक रहते भी हैं|

2.5

पृथ्वी पर ज्वार सूर्य और चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण का एक परिणाम है

चंद्रमा , और कुछ हद तक सूर्य, पृथ्वी पर ज्वार उतपन्न करते हैं | पृथ्वी और विशेष रूप से इसके महासागरों पर, चंद्रमा और सूर्य के निकटतम की तरफ़ और उसके विपरीत दिशा मे दोनों तरफ , उभार होते हैं | जब पृथ्वी घूमती है, ये उभार तटरेखा तक पहुंच जाते हैं, जिससे वहां के जल स्तर वृद्धि होती है | जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा लगभग एक सीधी रेखा में होते हैं (पूर्णिमा पर और अमावस्या पर), तो हम उच्च "वसंत ज्वार" का अनुभव करते हैं| इसके विपरीत, जब सूर्य और चंद्रमा पृथ्वी के सापेक्ष एक दूसरे के समकोण पर होते हैं (पहली और तीसरी तिमाही चंद्रमा पर), हम कम "नीप ज्वार" का अनुभव करते हैं|

2.6

सूर्य का प्रकाश पृथ्वी पर अधिकांश जीवन रूपों के लिए आवश्यक है

सूर्य पृथ्वी पर जीवन रूपों द्वारा उपयोग की जाने वाली ऊर्जा का प्राथमिक स्रोत है| उदाहरण के लिए, पौधे सूर्य के प्रकाश का उपयोग करके प्रकाश संश्लेषण करते हैं, जिससे उनकी वृद्धि होती है और परिणामस्वरूप आणविक ऑक्सीजन का उत्पादन| उस ऑक्सीजन का उपयोग जानवरों द्वारा सांस लेने के लिए किया जाता है| ऐसा माना जाता है कि जब एक क्षुद्रग्रह पृथ्वी से टकराया, तो उसके परिणामस्वरूप वैश्विक पर्यावरण की तबाही हुई, जिससे उड़ने में असमर्थ डायनासोरों और पृथ्वी पर अधिकांश प्रजातियों का विलुप्त हो गयीं । इस टक्कर से उत्पन्न विस्फोट ने वायुमंडल में बड़ी मात्रा में धूल फैला दी, जिसने सूर्य की रोशनी को अवरुद्ध कर दिया और लंबे समय तक चलने वाला प्रभाव शीत ऋतु का कारण बना। सूर्य की रोशनी हमारे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को भी प्रभावित करती है। सूर्य की रोशनी में रहने पर हमारी त्वचा विटामिन डी का उत्पादन करती है, जो हमारे शरीर की जैवरासायनिक प्रक्रियाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। कुछ अध्ययनों में मानव अवसाद और सूर्य की रोशनी के संपर्क की कमी के बीच संबंध दिखाया गया है।

2.7

सूर्य से कण पृथ्वी की यात्रा करते हैं और ध्रुवीय प्रभा प्रभा (अरोरा )का कारण बनते हैं

एक सौर प्रस्फुटन के दौरान, सूर्य से आवेशित कण (मुख्य रूप से इलेक्ट्रॉनऔर प्रोटॉन) पृथ्वी की ओर 150 मिलियन किलोमीटर की यात्रा करते हैं| वे पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र मे उलझकर चुंबकीय ध्रुवों की ओर बहने लगते हैं, और वायुमंडल में कणों के साथ अंत:क्रिया करते हैं | इन कणों में से सबसे तेज सूर्य से पृथ्वी तक लगभग आधे घंटे में यात्रा कर सकते हैं; सबसे धीमे को लगभग पांच दिन लगते हैं| कभी -कभी, ये कण तूफान पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र में बाधा उत्पन्न कर देते हैं , जिससे उपग्रहों और बिजली ग्रिड को नुकसान पहुंचता है | अक्सर, सूर्य से कण पृथ्वी के वायुमंडल में ऑक्सीजन और नाइट्रोजन के साथ अंत:क्रिया करते हैं| यह अंत:क्रिया ध्रुवीय प्रभा (औरोरा) को जन्म देती है - यह अद्भुत प्रकाश उत्तरी गोलार्ध (उत्तर ध्रुवीय प्रभा या अरोरा बोरेलिस) और दक्षिणी गोलार्ध ( दक्षिण ध्रुवीय प्रभा या अरोरा आस्ट्रेलिस ) के चुंबकीय ध्रुवों के चारों ओर के रात के आकाश को रोशन करता है|

2.8

खगोलीय अनुसंधान के लिए विकसित की गयी प्रौद्योगिकी हमारे दैनिक जीवन का हिस्सा है

खगोलीय डेटा का अध्ययन करने के लिए उपयोग किए गए विश्लेषणात्मक उपकरण और तरीके अब उद्योग, चिकित्सा विज्ञान और हमारे दैनिक उपयोग की तकनीक में प्रयोग कर लिए गए हैं। मूल रूप से खगोलीय अनुसंधान के लिए विकसित किए गए संसूचक (डिटेक्टर) अब डिजिटल कैमरों में भी उपयोग किए जाते हैं, जैसे कि हमारे मोबाइल फोनों में। खगोलीय दूरबीनों के लिए विकसित किया गया विशेष कांच एलसीडी स्क्रीन और कंप्यूटर चिप्स के निर्माण में, साथ ही सिरेमिक स्टोवटॉप्स में भी उपयोग किया जाता है। खगोल विज्ञान और चिकित्सा के बीच ज्ञान का स्थानांतरण मैग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग (एमआरआई) और कंप्यूटरीकृत टोमोग्राफी (कैट स्कैनर्स) जैसे अन्य उपकरणों के विकास में योगदान दिया है।