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            "text": "ब्रह्मांडीय विस्तार ब्रह्मांड में प्रकाश के गुणों को प्रभावित करता है| सुदूर गैलेक्सियों  से हम तक पहुँचने वाला प्रकाश अधिक दूरियों के साथ और अधिक  अभिरक्त विस्थापित होता जाता है | इस ब्रह्माण्ड संबंधी अभिरक्त विस्थापन  के कारक को सीधे ब्रह्मांडीय पैमाने  प्रकाश की तरंग दैर्ध्य में वृद्धि (लंबी तरंग दैर्ध्य के रूप में  विस्तार) के संदर्भ में समझा जा सकता है।| यही कारण है कि दूर की गैलेक्सियों को केवल अवरक्त  या रेडियो बैंड में देखा जा सकता है, और क्यों ज्यादातर कॉस्मिक माइक्रोवेव विकिरण हमारे पास  माइक्रोवेव में पहुंचता है|",
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            "headline": "प्रकृति के नियम  (जैसे गुरुत्वाकर्षण) जो हम पृथ्वी पर अध्ययन करते हैं, पूरे ब्रह्मांड में उसी तरह से काम करते  प्रतीत होते  हैं|",
            "text": "यह देखने के लिए कई प्रयोग  किए गए हैं कि क्या भौतिकी के नियम, जैसे कि गुरुत्वाकर्षण, ऊष्मागतिकी  और विद्युत् चुंबकत्व  को नियंत्रित करने वाले नियम, पृथ्वी पर और सुदूर ब्रह्मांड में  एक  समान हैं| अब तक, ऐसे सभी परीक्षणों से संकेत मिलता है कि भौतिकी के मूलभूत नियम पूरे ब्रह्मांड में लागू होते हैं|",
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            "text": "ब्रह्मांड के बड़े अभिरक्त विस्थापन  सर्वेक्षणों से पता चला है कि कुछ करोड़ प्रकाश वर्ष आकर के बड़े पैमाने पर, ब्रह्मांड एक तीन-आयामी, स्पंज-जैसे तन्तुओं के जाल   और रिक्त स्थान जैसा दिखता है, जिसे खगोलविद \"ब्रह्मांडीय जाल\" ( कॉस्मिक वेब) कहते हैं| तन्तुओं और चादर में लाखों गैलेक्सियाँ  होती हैं| ये बड़े पैमाने की  संरचनाएं सैकड़ों लाखों प्रकाश-वर्ष तक फैली हुई होती हैं और आमतौर पर दसियों लाख प्रकाश-वर्ष मोटी होती हैं| तन्तु और चादर रिक्त स्थान के चारों ओर सीमाएँ बनाते हैं, जो व्यास में दस करोड़  प्रकाश वर्ष के दर्जे के  होते हैं, और इनमें  बहुत कम गैलेक्सियाँ  होती हैं|",
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            "headline": "ब्रह्मांड के विकास को बिग बैंग मॉडल द्वारा समझाया जा सकता है",
            "text": "अब तक के उपलब्ध सर्वोत्तम साक्ष्यों के अनुसार, हमारे आस-पास दिखने वाला सारा द्रव्यमान और ऊर्जा  13 अरब  वर्ष  पहले एक परमाणु से भी छोटे आयतन में समाहित थे| ब्रह्मांड ने इस अत्यधिक उच्च घनत्व और तापमान वाले चरण (बिग बैंग चरण) से अपनी वर्तमान स्थिति तक  विस्तार किया| विस्तृत होते ब्रह्मांड का वर्णन करने वाले मॉडलों को लैम्ब्डा सी डी एम कहा जाता है (जहां लैम्ब्डा ब्रह्मांड के अदृश्य  ऊर्जा घटक के लिए है, और सीडीएम ठंडे  अदृश्य पदार्थ  के लिए है)| बिग बैंग चरण, अपने नाम के बावजूद, एक विस्फोट नहीं था, जहां पदार्थ पहले से मौजूदा खाली जगह में फ़ैल गया | सभी उपलब्ध स्थान शुरू से ही पदार्थ  से भरे थे और जैसे -जैसे अंतरिक्ष फैलता गया, औसत पदार्थ घनत्व तब से कम होता गया है| जब से गैलेक्सियों  का निर्माण हुआ है , उनके बीच औसत दूरी लगातार बढ़ रही है| बिग बैंग मॉडल हमारे वर्तमान ब्रह्मांड के बारे में कई परीक्षणयोग्य भविष्यवाणियां करता है, जिनमें से अधिकांश की  पुष्टि   डेटा का उपयोग करके हो  गई है|",
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            "text": "हमारा  सौर मंडल  एक केंद्रीय तारा  जिसे हम सूर्य कहते हैं और इसके गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव वाली कक्षा में स्थित प्रत्येक  पिण्ड  से मिलकर बना  है | इन पिण्डों  में ग्रह और उनके प्राकृतिक उपग्रह, बौना ग्रह, क्षुद्रग्रह, उल्कापिंड और धूमकेतु शामिल हैं| सूर्य सौर मंडल के कुल द्रव्यमान के 99.87% से अधिक के लिए उत्तरदायी है ",
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            "text": "2006 के अंतर्राष्ट्रीय खगोलीय संघ संकल्प के अनुसार, किसी पिण्ड को एक ग्रह होने के लिए उसे तीन मानदंडों को पूरा करना होगा| पहला यह है कि उसे सूर्य की परिक्रमा करनी चाहिए| दूसरा यह है कि एक ग्रह के पास गुरुत्वाकर्षण के लिए पर्याप्त द्रव्यमान होना चाहिए ताकि इसे एक लगभग  गोलाकार आकार में बदला  जा सके, और अंत में, इसका गुरुत्वाकर्षण प्रभाव इतना होना चाहिए कि इसके आस पास की कक्षा में अन्य पिण्ड ना रह जाएं | ऐसे  पिण्ड जो चंद्रमा नहीं हैं और पहले दो नियमों का पालन करते  हैं, लेकिन तीसरी का नहीं, को बौना ग्रह कहा जाता है| सूर्य से गड़ना करने पर हमारे सौर मंडल में ग्रह इस प्रकार हैं , बुद्ध ,  शुक्र, पृथ्वी, मंगल, बृहस्पति, शनि, अरुण (यूरेनस) और वरुण (नेपच्यून) |",
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            "headline": "तारा एक स्वयं-प्रकाशमान पिंड है जो आंतरिक परमाणु प्रतिक्रियाओं द्वारा अपनी ऊर्जा उत्पन्न करता है ",
            "text": "तारे बहुत गर्म प्लाज्मा (एक गैस जहां परमाणुओं के इलेक्ट्रॉन और नाभिक काफी हद तक अलग हो जाते हैं) से बने होते हैं , जो अपने गुरुत्वाकर्षण द्वारा एक साथ बंधे होते हैं | किसी तारे की  स्थायी ऊर्जा का उत्पादन उसके केंद्र में होने वाली परमाणु प्रतिक्रियाओं के द्वारा होता है, जो शुरू में प्रोटॉन-प्रोटॉन श्रृंखला के माध्यम से  हाइड्रोजन  का  हीलियम में संलयन  (और अधिक विशाल सितारों के लिए कार्बन-नाइट्रोजन-ऑक्सीजन सीएनओ चक्र के माध्यम से )  करता है, उसके बाद ही   और भारी तत्वों का  संलयन होता है | तारे अपने गुरुत्वाकर्षण के कारण  ढहने की इच्छा का प्रतिकार अपने केंद्रीय संलयन प्रक्रियाओं के दौरान मुक्त हुई ऊर्जा के माध्यम से करते हैं  और स्थिर बने रहते हैं | इसी कारण से , हमारे सूर्य के समान या उससे कम द्रव्यमान वाले अधिकांश तारे कुछ अरबों या दसियों अरब वर्षों तक स्थिर बने रहते हैं।",
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            "text": "विशाल ठंडे आणविक बादलों का गुरुत्वीय संकुचन  तारों को जन्म देता है| जैसे जैसे बादल संकुचित होता है, इसका भीतरी भाग विभाजित हो जाता है जिसका केंद्रीय क्षेत्र लगातार सघन और गर्म होता जाता है | तापमान और दबाव के महत्वपूर्ण मानों के बाद , परमाणु संलयन आरम्भ होता है, और एक तारे का जन्म होता है।| यह युवा तारा शुरू में धूल और गैस की एक ग्रह निर्माण करने वाली डिस्क से घिरा हुआ होता है| लाखों वर्षों के दौरान, यह डिस्क ग्रहों और छोटे  पिण्डों  में  विभक्त हो जाती है |",
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            "text": "लगभग 14 लाख  किलोमीटर के एक मध्यवर्ती व्यास वाला  पृथ्वी का निकटतम तारा, सूर्य, इतना बड़ा है कि हम लगभग 13  लाख  पृथ्वियां  इसमें समा सकती  हैं | यद्यपि हमारे ग्रह की तुलना में हमारा तारा  बहुत बड़ा है, लेकिन ब्रह्मांड में और भी बहुत बड़े सितारे हैं| सूर्य के व्यास के लगभग 1400 गुना  व्यास वाला महाविशालकाय  VY कैनिस मेजरिस, अब तक ज्ञात  सबसे बड़ा तारा है| यदि VY कैनिस मेजरिस को  सौर मंडल के केंद्र में रखें , तो इसकी सतह बृहस्पति की कक्षा से परे होगी| सूर्य की तुलना में बहुत छोटे तारे भी हैं| निकटतम तारा, प्रॉक्सिमा सेंटौरी, लगभग 200,000 किलोमीटर के व्यास वाला  एक लाल वामन है, जो पृथ्वी के व्यास का  केवल 16 गुना है|",
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            "text": "यद्यपि यह दिखने में एक समान लगता है, सूर्य की सतह गहरे  धब्बों से युक्त हो सकती है | ये सूर्यकलंक(सनस्पॉट), या तीव्र चुंबकीय क्षेत्र, काले  दिखाई देते हैं क्योंकि वे आसपास के पदार्थ की तुलना में ठन्डे  होते हैं |  हर 11 वर्षों में, सूर्य कई धब्बे बनाने और कुछ धब्बे बनाने के बीच चक्र से गुजरता है। कभी-कभी, सूर्य के  चुंबकीय क्षेत्र में ऐंठन उत्पन्न हो जाती है, इससे  बहुत सारी ऊर्जा इकट्ठा हो जाती  है, और सूर्य इस ऊर्जा को प्रकाश और कणों के एक झोंके में छोड़ता है। इन झोंकों को विस्फोट  या  किरितीय  द्रव्यमान उत्सर्जन  कहा जाता है। लेकिन जब यह शांत होता है, तब भी सूरज लगातार लगभग 1.5 अरब  किलोग्राम गर्म, चुंबकित गैस  हर सेकंड में अंतरिक्ष में  निकालता रहता है।  यह सौर हवा सौर मंडल के माध्यम से बहती है और ग्रहों के साथ अन्तः क्रिया  करती है| अन्य तारे भी विस्फोट  और हवाओं का उत्पादन करते हैं| ",
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            "headline": "तारों के बीच का स्थान काफी हद तक खाली हो सकता है या इसमें गैस के बादल हो सकते हैं, जो नए तारों का उत्पादन कर सकते हैं",
            "text": "तारों के बीच की जगह में गैस, धूल और उच्च ऊर्जा कणों (\"कॉस्मिक किरणों\") के रूप में पदार्थ के सूक्ष्म अवशेष होते हैं | इस पदार्थ सामग्री को अंतरतारकीय  माध्यम कहा जाता है | यह  गैलेक्सी  के विभिन्न हिस्सों में कम या ज्यादा सघन  हो सकता है| हालाँकि, अंतरतारकीय माध्यम के सबसे सघन क्षेत्र भी प्रयोगशाला में बनाए गए सबसे अच्छे वैक्यूम की तुलना में एक हजार गुना कम सघन हैं।",
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            "text": "एक ब्लैक होल अंतरिक्ष वह  क्षेत्र है जिसका गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र इतना प्रबल होता है की एक बार  इसके घटना क्षितिज(इवेन्ट होराइजन) को पार कर लेने के बाद कुछ भी, यहाँ तक की प्रकाश  भी इससे बाहर नहीं निकल सकता। | घटना क्षितिज एक ब्लैक होल के चारों ओर एक सीमा सतह है, जहां इसके गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र से बचने के लिए आवश्यक गति प्रकाश की गति से अधिक  होती है|  सैद्धांतिक मॉडलों  के अनुसार एक  ब्लैक होल के केंद्र में एक विलक्षणता होती है, जहां पदार्थ के  घनत्व और दिक् काल (स्पेसटाइम) की  वक्रता अनंत के करीब पहुंच जाती  है| तारकीय  द्रव्यमान ब्लैक होल का द्रव्यमान  कुछ दहाई सौर द्रव्यमानों के आसपास  होता है, वह भी ऐसे  क्षेत्र में जिसकी त्रिज्या  कुछ किलोमीटर से लेकर कुछ दहाई किलोमीटर (द्रव्यमान के आधार पर)  के बीच होती है ",
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            "text": "हाइड्रोजन , अधिकांश हीलियम और थोड़ी मात्रा में लिथियम के अलावा, वर्तमान ब्रह्मांड के सभी तत्व  परमाणु संलयन द्वारा तारों के अंदर उत्पन्न  हुए हैं | सूर्य की तरह कम-द्रव्यमान वाले तारे, ऑक्सीजन तक के तत्वों का उत्पादन करते हैं, जबकि  विशाल  तारे ऑक्सीजन और लोहे से अधिक भारी  तत्वों का उत्पादन कर  सकते हैं |सोने और यूरेनियम जैसे लोहे की तुलना में भारी तत्व, उच्च-ऊर्जा सुपरनोवा विस्फोट और न्यूट्रॉन स्टार टकराव के दौरान बनते हैं|  जब तारों का अंत होता है तब वे अपना अधिकतर पदार्थ अंतर तारकीय आकाश में मुक्त कर देते हैं |  इसी पदार्थ से नए  तारे  बनते हैं, एक तरह से   पुनर्चक्रण प्रक्रिया का  ब्रह्मांडीय संस्करण |",
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            "headline": "हम एक सर्पिल गैलेक्सी में रहते हैं जिसे आकाशगंगा कहा जाता है ",
            "text": "हमारी आकाशगंगा, केंद्र में एक छड़  के आकार की संरचना युक्त,  एक सर्पिल गैलेक्सी है | सौर मंडल एक सर्पिल भुजा में, गैलेक्सी केंद्र से लगभग 25,000 प्रकाश-वर्ष की दूरी पर स्थित है | हमारी आकाशगंगा का दृश्यमान हिस्सा लगभग 100,000-120,000 प्रकाश-वर्ष व्यास वाला और केवल 2,000 प्रकाश-वर्ष की मोटाई  वाले तारों का एक डिस्क-आकार का संग्रह है| इस डिस्क में युवा तारे और धूल सर्पिल भुजा का निर्माण करते  हैं| एक अंधेरी रात में और एक उपयुक्त रूप से अंधेरे स्थान से, हम आकाशगंगीय डिस्क के 100 अरब से अधिक तारों के  कुछ हिस्सों को आकाश में विशाल धुंधली पट्टी के रूप में देख सकते हैं जो आकाश में झुकती हुई नजर आती है।  हमारी अपनी गैलेक्सी  के भीतर से हमारा दृश्य है।",
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                "Milky Way and Interstellar Medium"
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            "headline_in_english": "The spiral arms of galaxies are created by pile-ups of gas and dust",
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            "headline": "गैलेक्सियों  की सर्पिल भुजाएं   गैस और धूल के ढेर द्वारा निर्मित होते  हैं",
            "text": "सर्पिल भुजाओं  के गठन के बारे में एक व्यापक रूप से स्वीकृत सिद्धांत यह है कि वे एक गैलेक्सी  चक्रिका  में घनत्व तरंग के चलने का परिणाम होते हैं, जिससे तारे, गैस और धूल एक व्यस्त राजमार्ग पर ट्रैफिक जाम की तरह इकट्ठा हो जाते हैं। यह चक्रिका  में सघन क्षेत्